प्रमुख वैज्ञानिकों, आयुष विशेषज्ञों और उद्योग जगत के नेताओं ने हर्बल चिकित्सा के वैज्ञानिक सत्यापन, नवाचार और वैश्विक प्रगति पर विचार-विमर्श किया
नई दिल्ली, 23 अक्टूबर 2026: सोसाइटी फॉर न्यू एज हर्बल्स (SNAH) ने 23 अक्टूबर को जामिया हमदर्द, नई दिल्ली स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन यूनानी मेडिसिन (फार्माकोग्नोसी एवं फार्माकोलॉजी) में अपना कॉन्क्लेव एवं पुरस्कार समारोह 2026 सफलतापूर्वक आयोजित किया। कार्यक्रम में देशभर से आए 150 से अधिक प्रतिनिधियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इनमें प्रतिष्ठित वैज्ञानिक, शिक्षाविद, आयुष विशेषज्ञ, नीति-निर्माता, उद्योग प्रतिनिधि और युवा शोधकर्ता शामिल थे।
कॉन्क्लेव का आयोजन सोसाइटी फॉर न्यू एज हर्बल्स के अध्यक्ष, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन यूनानी मेडिसिन (CoEUM), जामिया हमदर्द के निदेशक तथा आयोजन अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) सईद अहमद के नेतृत्व में किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य पारंपरिक औषधीय ज्ञान को आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोणों के साथ जोड़ना तथा प्रमाण-आधारित अनुसंधान, गुणवत्ता मानकीकरण, नवाचार और हर्बल एवं आयुष औषधियों की वैश्विक स्वीकार्यता को बढ़ावा देना था।
प्रसिद्ध हर्बल विद्वान श्री सी. पी. खरे द्वारा स्थापित सोसाइटी फॉर न्यू एज हर्बल्स पारंपरिक ज्ञान और समकालीन विज्ञान के बीच सेतु बनाने के लिए कार्य कर रही है। यह संस्था हर्बल चिकित्सा को आगे बढ़ाने के लिए शिक्षण संस्थानों, अनुसंधान संस्थानों, उद्योग और नियामक संगठनों को एक मंच पर लाती है।
उद्घाटन समारोह में भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के सलाहकार (आयुर्वेद) डॉ. कौस्तुभ उपाध्याय मुख्य अतिथि, भारत सरकार के जैव-प्रौद्योगिकी विभाग के पूर्व सलाहकार डॉ. मोहम्मद असलम विशिष्ट अतिथि तथा जामिया हमदर्द के कुलपति प्रो. (डॉ.) एम. ज़ेड. आबिदीन उपस्थित रहे।
अन्य विशिष्ट अतिथियों में SNAH की गवर्निंग बॉडी के अध्यक्ष तथा ICMR की मेडिसिनल प्लांट यूनिट के पूर्व प्रमुख डॉ. नीरज टंडन; SNAH के पूर्व अध्यक्ष तथा नई दिल्ली स्थित ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद (AIIA) और NIPER गुवाहाटी के सलाहकार डॉ. सी. के. कटियार; SNAH की उपाध्यक्ष डॉ. दीपिका गुनावंत; तथा सोसाइटी के सचिव श्री मोहंदास एस. मेनन शामिल थे।
कार्यक्रम में कई प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों, उद्योग प्रतिनिधियों और वरिष्ठ शिक्षाविदों ने भी भाग लिया। इनमें मेडिसिनल एंड एरोमैटिक प्लांट्स एब्स्ट्रैक्ट्स (MAPA) के पूर्व संपादक डॉ. ज्ञान सिंह; SNAH के पूर्व अध्यक्ष डॉ. संजय शर्मा; SNAH की कोषाध्यक्ष तथा मल्टानी हर्बल्स से जुड़ी डॉ. रुचि श्रीवास्तव; रेकिट बेनकाइज़र के डॉ. गौरव शर्मा; आयुर्फ्रेश ग्रीन LLP के श्री अमित वर्मा; यूनानी ड्रग्स मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (UDMA) का प्रतिनिधित्व करते हुए न्यू रॉयल प्रोडक्ट्स के प्रबंध निदेशक श्री सैयद मुनीर अजमत; तथा जामिया हमदर्द की वरिष्ठ संकाय सदस्य डॉ. उजमा बानो, डॉ. राबिया परवीन, डॉ. बुशरा परवीन, प्रो. एस. आर. मीर और प्रो. एम. मुजीब शामिल थे। उनकी भागीदारी से हर्बल एवं पारंपरिक चिकित्सा के विकास के लिए कार्यरत शिक्षण जगत, उद्योग और पेशेवर संगठनों के बीच संवाद को और मजबूती मिली।
सोसाइटी फॉर न्यू एज हर्बल्स पुरस्कार 2026 प्रदान किए गए
कॉन्क्लेव का प्रमुख आकर्षण सोसाइटी फॉर न्यू एज हर्बल्स पुरस्कार 2026 की शुरुआत रही। ये पुरस्कार पहली बार हर्बल विज्ञान, आयुष, वैज्ञानिक सत्यापन, अनुप्रयुक्त अनुसंधान तथा उभरते वैज्ञानिक नेतृत्व में उल्लेखनीय योगदान को सम्मानित करने के लिए शुरू किए गए।
सम्मानित पुरस्कार विजेता इस प्रकार थे:
1. हर्बल एवं आयुष विज्ञान में विशिष्ट योगदान पुरस्कार: श्री अनिल जौहरी, भारतीय गुणवत्ता परिषद के नेशनल एक्रेडिटेशन बोर्ड फॉर सर्टिफिकेशन बॉडीज़ (NABCB) के पूर्व CEO—गुणवत्ता आश्वासन, प्रत्यायन और नियामक प्रणालियों में योगदान के लिए।
2. ज्ञान से साक्ष्य तक उत्कृष्टता पुरस्कार: प्रो. प्रदीप के. प्रजापति, नई दिल्ली स्थित ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद (AIIA) के पूर्व निदेशक—आयुर्वेदिक चिकित्सा के वैज्ञानिक सत्यापन, अनुसंधान और विकास में योगदान के लिए।
3. परंपरा से अनुप्रयोग तक उत्कृष्टता पुरस्कार: डॉ. रणजीत आनंद पुराणिक, श्री धूतपापेश्वर लिमिटेड के प्रबंध निदेशक एवं CEO—पारंपरिक आयुर्वेदिक ज्ञान को मानकीकृत औषधीय उत्पादों में बदलने और औद्योगिक नवाचार में योगदान के लिए।
4. हर्बल अनुसंधान में उत्कृष्टता पुरस्कार: डॉ. संजय एम. तामोली, TIMER, मुंबई के CEO—हर्बल अनुसंधान, वैज्ञानिक नवाचार और प्रमाण-आधारित हर्बल उत्पादों के विकास में योगदान के लिए।
5. SNAH नेक्स्टजेन हर्बल रिसर्च अवॉर्ड 2026: डॉ. रॉबिन बादल, AIIA, नई दिल्ली तथा डॉ. विजय कुमार, सेंट्रल आयुर्वेद रिसर्च इंस्टीट्यूट (CARI), केंद्रीय आयुर्वेदिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (CCRAS), आयुष मंत्रालय—हर्बल एवं आयुष विज्ञान में आशाजनक शोध योगदान और वैज्ञानिक क्षमता के लिए।
पुरस्कार विजेताओं को उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया। इन पुरस्कारों की शुरुआत वैज्ञानिक उत्कृष्टता, नवाचार, अनुप्रयुक्त अनुसंधान और युवा शोधकर्ताओं की अगली पीढ़ी को प्रोत्साहित करने की दिशा में सोसाइटी की एक महत्वपूर्ण पहल है।
अपने संबोधन में प्रो. (डॉ.) सईद अहमद ने कहा कि भारत की पारंपरिक चिकित्सा का भविष्य शास्त्रीय ज्ञान को आधुनिक तकनीकों के साथ वैज्ञानिक रूप से एकीकृत करने में है। इन तकनीकों में उन्नत क्रोमैटोग्राफी, मेटाबोलोमिक्स, फाइटोकेमिकल प्रोफाइलिंग, औषधीय प्रभावों का वैज्ञानिक सत्यापन और सिस्टम्स बायोलॉजी शामिल हैं।
उन्होंने मजबूत गुणवत्ता-नियंत्रण प्रणालियों, दोहराए जा सकने वाले अनुसंधान, सुरक्षा मूल्यांकन और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार्य नियामक मानकों से समर्थित वैज्ञानिक रूप से सत्यापित हर्बल औषधियों की आवश्यकता पर बल दिया।
प्रो. अहमद ने पारंपरिक औषधीय ज्ञान को नवाचारी, किफायती और वैश्विक स्तर पर स्वीकार्य स्वास्थ्य समाधानों में बदलने के लिए शिक्षण संस्थानों, अनुसंधान संगठनों, हर्बल उद्योगों और नियामक एजेंसियों के बीच सहयोग मजबूत करने के महत्व पर भी जोर दिया।
उन्होंने सोसाइटी फॉर न्यू एज हर्बल्स को वैज्ञानिक विचार-विनिमय, अनुसंधान सहयोग, पेशेवर सम्मान, उद्योग सहभागिता और युवा शोधकर्ताओं के मार्गदर्शन के लिए एक सक्रिय राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंच के रूप में विकसित करने की अपनी परिकल्पना भी प्रस्तुत की।
सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन यूनानी मेडिसिन ने अनुसंधान एवं वैज्ञानिक उपलब्धियां प्रस्तुत कीं
कॉन्क्लेव में भारत सरकार के आयुष मंत्रालय की वित्तीय सहायता से स्थापित जामिया हमदर्द के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन यूनानी मेडिसिन (CoEUM) के योगदान को भी रेखांकित किया गया। केंद्र यूनानी औषधियों के वैज्ञानिक सत्यापन और गुणवत्ता मानकीकरण की दिशा में कार्य कर रहा है।
प्रो. (डॉ.) सईद अहमद के निदेशकत्व में CoEUM फार्माकोग्नोसी, फाइटोकेमिस्ट्री, मेटाबोलोमिक्स, क्रोमैटोग्राफी, हर्बल औषधियों के गुणवत्ता नियंत्रण और प्रायोगिक फार्माकोलॉजी में बहुविषयक अनुसंधान को आगे बढ़ा रहा है। केंद्र अनुसंधान प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण, शैक्षणिक सहयोग और पारंपरिक चिकित्सा के बारे में वैज्ञानिक जागरूकता को भी प्रोत्साहित कर रहा है।
प्रो. अहमद ने जामिया हमदर्द के संस्थापक स्वर्गीय हकीम अब्दुल हमीद की दूरदर्शी विरासत को याद किया। पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को आधुनिक शिक्षा और वैज्ञानिक अनुसंधान के साथ जोड़ने की उनकी प्रतिबद्धता आज भी संस्थान का मार्गदर्शन करती है।
कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण आकर्षण केंद्र के समाचार-पत्र ‘CoEUM Bulletin’ के चौथे संस्करण का विमोचन था। इसमें केंद्र की अनुसंधान उपलब्धियों, शैक्षणिक पहलों, वैज्ञानिक गतिविधियों और प्रमाण-आधारित यूनानी चिकित्सा के विकास में योगदान का विवरण दिया गया है।
सोसाइटी के दृष्टिकोण और भविष्य के सहयोग को मजबूत करना
कॉन्क्लेव ने सोसाइटी के संस्थापक अध्यक्ष श्री सी. पी. खरे के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई और डाबर इंडिया लिमिटेड के पूर्व चेयरमैन एमेरिटस श्री वी. सी. बर्मन के दीर्घकालीन प्रोत्साहन एवं सहयोग को स्वीकार किया।
प्रो. अहमद ने सोसाइटी की गवर्निंग बॉडी, कार्यकारी समिति, वरिष्ठ सदस्यों, मार्गदर्शकों और विशिष्ट पुरस्कार विजेताओं के मार्गदर्शन एवं सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने पारंपरिक ज्ञान, समकालीन विज्ञान, नियामक संस्थानों और हर्बल उद्योग को जोड़ने वाले एक अधिक सशक्त सहयोगी मंच के रूप में सोसाइटी को विकसित करने के महत्व पर जोर दिया।
आयोजकों ने कार्यक्रम के प्रायोजक आयुर्फ्रेश ग्रीन्स LLP के उदार सहयोग तथा सभी आमंत्रित गणमान्य व्यक्तियों, वक्ताओं, प्रतिभागियों और आयोजन दल के सदस्यों के योगदान के लिए भी आभार व्यक्त किया।
कॉन्क्लेव का समापन वैज्ञानिक रूप से सत्यापित, गुणवत्ता-आश्वस्त और वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त हर्बल एवं पारंपरिक औषधियों को आगे बढ़ाने की सामूहिक प्रतिबद्धता के साथ हुआ।
सोसाइटी फॉर न्यू एज हर्बल्स कॉन्क्लेव एवं पुरस्कार समारोह 2026 का सफल आयोजन वैज्ञानिक उत्कृष्टता, अनुप्रयुक्त अनुसंधान और उद्योग-शिक्षा जगत के सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम रहा। साथ ही, इसने भारत में प्रमाण-आधारित पारंपरिक चिकित्सा को बढ़ावा देने में सोसाइटी और CoEUM की नेतृत्वकारी भूमिका को और सुदृढ़ किया।
